जबर नाथ पुरोहित
जीवन परिचय (डॉ. जबरनाथ पुरोहित ) डॉ. जबरनाथ पुरोहित का जन्म जोधपुर के मठवाला परिवार में 7 जुलाई,1929 को हुआ । आपके पिता का नाम श्री अम्बादास पुरोहित एवं माता का नाम बुधकंवर था । आपने अपने मामा श्री मदनमोहन जी रामदेव की प्रेस में कम्पोजिटर के कार्य कर अपना जीवन यापन आरम्भ किया । स्नातक की परीक्षा साथ साथ उतीर्ण करने के बाद आपने साथ ही साथ एम.ए.(हिन्दी) में स्नातकोतर करने के बाद मॉर्डन स्कूल से शिक्षक के रुप में अपनी जीवन यात्रा आरम्भ की । इसी विघालय में रहते हुए ही इन्होने बी.एड. की परीक्षा उतीर्ण की तत्पश्चात् आपका चयन श्री महेश उच्च माध्यमिक विघालय में हुआ । इस विघालय में आपने 1957 को शिक्षक कार्य आरम्भ किया और लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं देने के बाद जब इसी महेश शिक्षण संस्थान में बी.एड. विश्वविघालय की स्थापना हुई तब साक्षात्कार के माध्यम से आपका चयन बी.एड. कॉलेज में लेक्चरर के पद पर कर दिया गया । इसी कॉलेज में शिक्षण कार्य करते हुए ही आपने शिक्षण संस्थान की प्रबन्ध समिमि के निर्देशानुसार वनस्थली विघापीठ से एम.एड. की परीक्षा सफलता पूर्वक उतीर्ण की तदोपरान्त आपने शिक्षा में पी.एच.डी.(डाक्टरेट) एन.सी.ई.आर.टी.,नई दिल्ली में कार्यरत प्रो0 के0के0वशिष्ट के निर्देशन में पूरी की । पुनः लौटने पर आपको महेश शिक्षण संस्थान के महाविघ् ाालय में पुनः लेक्चरर के पद पर नियुक्ति दी गई । 1965 से 1992 तक लगातार इसी महाविधालय में अध्यापन कार्य करते करते आपको प्रोफेसर पद पर पदोन्नत किया गया और अपनी सेवा निवृति तक आप महेश महाविघालय से उप प्राचार्य के पद से 1992 में सेवा निवृत हुए । तत्पश्चात् आपका चयन देश के जाने माने उद्योगपति और शिक्षाविद् द्वारा स्थापित मोदी शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान ,लक्ष्मणगढ़(सीकर)में महिला बी.एड. महाविघालय में प्राचार्य पद पर चयन किया गया यहां डॉ.पुरोहित ने 9 वर्षों तक प्राचार्य पद पर कार्य किया । आपकी विलक्षण साहित्य प्रतिभा को देखते हुए मोदी शिक्षा एवं अनुसंधान के स्थापक संसद सदस्य श्री आर.पी.मोदी ने प्रकाशन का कार्य आरम्भ किया और इस विभाग में डॉ. पुरोहित को महा प्रबन्धक(प्रकाशन विभाग ) का उतर दायित्व दिया गया । जिसका निर्वाह आपने सफलता पूर्वक किया और 7 वर्षों तक इस पद पर रहते हुए आपने दो महा काव्यों का सम्पादन किया । इस उतरदायित्व का निर्वाह करने के बाद आप स्वयं ने मोदी शिक्षा एवं अनुसंध् ाान संस्थान के निदेशक और स्थापक को स्वयं अपना त्यागपत्र प्रेषित किया क्यूंकि अब संस्थान में प्रकाशन का कार्य मन्द और लगभग कम भी होने लगा था। अब डॉ. पुरोहित ने पुनः साहित्य सृजना आरम्भ की यू ंतो महेश शिक्षण संस्थान में रहते हुए ही आपने अनेको शिक्षा से सम्बन्धित पुस्तकें लिखी और यह साहित्य सृजन का कार्य अविरल गति से चलता ही रहा इसका परिणाम यह कि आपने शिक्षा से सम्बन्धित लगभग 18 पुस्तकें लिखी और साथ ही कविता और गीत भी लिखे जिनकी पुस्तकें समय-समय पर प्रकाशित होती रही । जिसमें कविता,गीत,संस्मरण , बाल साहित्य,और शिक्षा से सम्बन्धित अनेकों पुस्तकांे का प्रकाशन हुआ । आपने समाचार पत्रों का सम्पादन भी किया और महेश शिक्षण संस्थान द्वारा प्रतिमाह प्रकाशित एज्यूकेशन हेराल्ड का भी लगभग 15 वर्षोेै तक संपादन कार्य किया । कवि सम्मेलनों का आयोजन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन और आयोजन में आपनी प्रतिभा का लोहा आज भी कवि, साहित्यकार और कलाकार मानते है और आज भी इस प्रकार के सफल आयोजनों के लिए आपको स्मरण किया जाता है । महेश शिक्षण संस्थान में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय श्री सोहनलाल मनिहार सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सफलता पूर्वक संचालन और आयोजन आपकी विलक्षण प्रतिभा का सूचक था । सम्भवतया इस कार्यक्रम में अत्यधिक भीड़ का एकत्रित होना सांस्कृतिक कार्यक्रम के संचालन में आपकी मधुर आवाज को सुनने के बाद लोग मंत्रमुग्ध हो जाते थे । यहां डॉ. पुरोहित के विषय में यह बात जो सर्वप्रथम बतानी चाहिए थी , वह यह थी कि आपने अपने जीवन में प्रथम बार जो राशि प्राप्त हुई थी वह ऑल इण्डिया रेडियों के माध्यम से 20/- रु. के रुप में वहां कविता पाठ करने के पश्चात् प्राप्त हुई थी । यह आपकी पहली आमदनी थी जो रेडियो स्टेशन, जोधपुर द्वारा प्रदान की गई । यह बात सन् 1957 की है । और इसके बाद तो यह सिलसिला निरन्तर चलता ही रहा और इसी स्थान से आपने अपना कर्म आरम्भ किया यही संे प्रथम राशि जिसे प्रथम जीविकोपार्जन राशि भी कहा जा सकता है और फिर वह विकराल काल भी सामने आ खड़ा हुआ जब डॉ. पुरोहित ने 24 फरवरी, 2009 को प्रातः 7.30 इसी आकाशवाणी के रिकॉर्डिंग कक्ष में जहां आपको कविता पाठ हेतु आमन्त्रित किया गया था, कविता पाठ आरम्भ करने से ठीक 5 मिनट पूर्व ही स्टूडियों में ही आपके प्राण पखेरु आकाश से होते हुए क्षितीज में विलीन हो गये कभी न मिलने के लिए, कभी न दिखाई देने के लिए । तब डॉ. पुरोहित की यह पंक्तियां स्मरण आती है कि विधाता से यही प्रार्थना है कि में कर्म करते करते ही अपने प्राणों का त्याग करुं । जिस आकाशवाणी से अपनी कर्मयात्रा को , अपनी जीवन यात्रा को आरम्भ किया उसी भूमि पर अपने प्राण भी त्याग दिये । इस महान् साहित्यरत्न, गीतकार, प्रतिष्ठित कवि,समीक्षक एवं शिक्षाविद् ने अपने जीवन की अन्तिम सांस कर्मस्थल पर ही ली । डॉ.पुरोहित की प्रकाशित कृतियांः- जीवन चरितः- लोक नायक जयनारायण व्यास-व्यक्तित्व और विचार(1977), संस्कृति का शिखर पुरुष(1999), हमारे पुरोघ् ाा जयनारायण व्यास (1999) काव्यः- बिगुल बज उठा(1963-प्रथम काव्य कृति), अर्गला(1964),समर्पण (1966),सत्यमेव जयते (1967), फिर एक वर्ष बीत गया (1970), समय की शिला पर (1983), पर कटा पक्षी (1973), नयी पीढ़ी के नाम(1978), सपने और शब्द (1988), जो मुझे तोड़ती है (1991), यह भी हो सकता है (1997), रेंगती है चींटियां(2000), मुझको अद्भुत सपना आता (2003), जो मुझमें रहते हैं(2004), (सभी काव्य संग्रह ) बाल साहित्यः- हम भी ऐसे बने, यह धरती उपजाउ है , ये तो गीत हमारे है , राजस्थान के कवि नव साक्षरों के लिए:- आओ घेरों को तोड़ें(1981), अंधेरे से उजाले में (1981) संस्मरण:- स्नेह और सानिध्य के क्षण (2001) शिक्षा से सम्बन्धित:- भाषा शिक्षण(1964), शिक्षा की समस्याएॅं(1968), स्वतन्त्र भारत में शिक्षा का विकास(1970), शिक्षा में नव चिन्तन,समस्याएं एवं अनुसंधान(1985),भारतीय शिक्षा:विशेषता एवं चिंताएं (1995), शिक्षा एवं भारतीय समाज(1966), शिक्षा एवं भारतीय समाज(1966), शैक्षिक एवं भारतीय समाज (1966), शैक्षिक प्रबन्ध एवं शिक्षा की समस्याएॅं(1996) सम्पादन कार्यः- इन्सान(साप्ताहिक), एज्यूकेशन हेराल्ड, शिक्षा के नये क्षितीज , लोकनायक जयनारायण व्यासःव्यक्तित्व एवं विचार , संस्कृति का शिखर पुरूष , हमारे पुरोधा:- जयनाराण व्यास, पंख और अकाश(शिक्षा विभाग द्वारा प्रकाशित शिक्षक, कवियों की चुनिंदा कविताओं का संकलन ) सम्पादन सहयोग:- भज मन चरण कमल अविनाशी, राष्ट््रीय चेतना के प्रेरक स्वर सम्मान एवं पुरस्कार:- 1. सपने और शब्द (सुधीन्द्र पुरस्कार-राजस्थान साहित्य अकादमी,उदयपुर(1991), रेंगती हैं चींटियां(सर्वोच्च मींरा सम्मान)-राजस्थान साहित्य अकादमी,उदयपुर (2001),समग्र साहित्य के लिए विशिष्ट साहित्यकार सम्मान-राजस्थान साहित्य अकादमी,उदयपुर (1999), रेंगती हैं चींटियां(राष्ट््रकवि दिनकर सम्मान)कवि सभा,चक्रध् ारपुर (झारखण्ड द्वारा ), महाराणा कुम्भा मेवाड़ सम्मान, उदयपुर ,राजघराना उदयपुर महाराजा अरविन्द मेवाड़ा की ओर से (2007), जयनारायण व्यास साहित्यकार सम्मान(जवाहर संस्थान, जोधपुर द्वारा)(2003), जनकवि गणेशीलाल व्यास उस्ताद सम्मान(कला त्रिवेणी संस्थान,जोधपुर द्वारा(2003), महाकवि वृन्द सम्मान(शिक्षा समिति,मेड़ता द्वारा)(2003),दुरसा आढ़ा सम्मान(अरावली साहित्य संस्थान, पाली द्वारा )(2003) इसके अतिरिक्त जोधपुर ही नहीं अपितु राजस्थान, महाराष्ट््र, और गुजरात की साहित्यिक संस्थाओं द्वारा डॉ. पुरोहित को सम्मानित किया गया । इस महान् शिक्षाविद्, साहित्यकार, कवि, गीतकार, समालोचक ,समीक्षक डॉ. जबरनाथ पुरोहित को हार्दिक श्रृद्धाजंलि देते हुए परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं कि इनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करें और हमें इनके आर्दशों और मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे , हमें सम्बल प्रदान करने की शक्ति प्रदान करें ।