बीकानेर के राजेश कुमार व्यास ने राजभवन जयपुर मे अतिरिक्त निदेशक ( जनसंपर्क ) का पदभार संभाला

पुष्करणा ब्राहमण

पुष्करणा समाज हिंदू धर्म में समृद्ध और प्रसिद्ध समाज है। पुष्करणा भारत में ब्राह्मण समुदायों में से एक है। पुष्करणा मुख्य रूप से सिंध (पाकिस्तान) और फारस (ईरान) क्षेत्र से आते हैं और सबसे पहले पोकरण में चले गए। पुष्करणा शब्द संस्कृत के शब्द "पुष्टिकर" से आया है या पोकरण के संक्षिप्त शब्द से, पोकरण के नाम का उल्लेख किए बिना, पुष्करणा का इतिहास नहीं लिखा जा सकता है। पुष्कर शहर का इसका व्युत्पत्ति संबंधी संबंध एक दोष है जो कुछ ऐतिहासिक ग्रंथों में अभी भी मौजूद है। पुष्करणा समाज हिंदू धर्म में समृद्ध और प्रसिद्ध समाज है। पुष्करणा (पुष्करणा के रूप में जाना जाता है) भारत में ब्राह्मण समुदायों में से एक है। पुष्करणा मुख्य रूप से सिंध (पाकिस्तान) और फारस (ईरान) क्षेत्र से आते हैं और सबसे पहले पोकरण में चले गए। पुष्करणा शब्द संस्कृत के शब्द "पुष्टिकर" से आया है या पोकरण के संक्षिप्त शब्द से, पोकरण के नाम का उल्लेख किए बिना, पुष्करणा का इतिहास नहीं लिखा जा सकता है। 

पुष्करणा ब्राहमण नामकरण


श्रीरूवाच

वेदवेदांग तत्वज्ञा भविष्यथ द्विजर्षभाः
उदारा राजपूज्याश्च शुद्धः सन्तोषिणाः सदा।
ब्राहमणानाम् पुष्टिकरा धर्मपुष्टिकरास्तथा
तस्मात्पुष्करणाविप्रा ज्ञानवन्तों भविष्यथ

 

विवाह कार्य समये सान्निध्यं ममसर्वदा‘‘
पुष्करणा ब्राहमण समाज कर उद्भव और विकास राष्ट्र की सेवा और मानव-धर्म सेवा के लिए सर्वस्व न्योछावर करने हेतु ही हुआ है। ‘ श्री पुष्करणा ब्राहमणोत्पति‘ शास्त्र में स्पष्ट व्यक्त किया है कि सत्य के लिए संघर्ष करके वेदों की आस्था को पालन करवाने वाले सैन्धवारण्य निवासी ब्राहमण समाज के लोग वेद और वेदांग के तत्व के ज्ञाता होगें, सदा उदारमना व परोपकार में दत्तचित रहेगें, राज्य का सम्मान पाने वाले शुद्ध आचरण वाले, सन्तोष भावना वाले तथा ब्रहम्त्व की पुष्टि करके राष्ट्रीय भावना में विकास करने वाले,धर्मानुरागी,ज्ञान की ज्योति जगाने वाले होंगे। क्योंकि यह समाज धर्म (सद्व्यवहार) की पुष्टि करने वाला है, अतः यह पुष्करणा ब्रहामण के नाम से संबोधित किया जायेगा। श्री (लक्ष्मी) विवाहादि हरेक शुभकार्य में पुष्करणा ब्राहमणों के साथ रहेगेी।


महालक्ष्मी मुखोम्भोजा-निःसृतं वरमुत्तमम ।
ततः प्रभृतिव ते विप्राः ख्यात ‘पुष्करणां भुवि।।

श्री लक्ष्मी जी के मुखरूपी कमल से उक्त वर प्राप्त हुआ तब से सैन्धवारण्य के ब्राहमण ‘पुष्करणे‘ नाम से प्रसिद्ध हुए।

 

समस्त पुष्करणा परिवार