अनिल थानवी

अध्यापक


श्री अनिल कुमार थानवी पेशे से एक सरकारी अध्यापक है तथा इनकी खगोल विज्ञान में रूचि है। पिछले लगभग 33-34 वर्षो से इन्होने चक्रमय ब्रम्हाण्ड पर एक रोचक चिन्तन विकसित किया है। इन्होने ब्रम्हाण्ड कैसे सृजन और विनाश करता है। इस पर एक बेहद आकर्षक सिद्धान्त दिया है। अनिल थानवी बता रहे है कि ऐसे चक्रमय ब्रम्हाण्ड से ब्लेक होल, तारे, गैलेक्सियाँ, नेबुलाए, ग्रह, उपग्रह, चन्द्रमा कैसे बनते है और कैसे नष्ट होकर वापस ब्रम्हाण्ड में घुलते चले जाते है। ये एक नये तरह से बताते है कि हमारा सौर मण्डल कैसे बना और विकसित हुआ तथा इसका भविष्य न्यूट्रोन तारा या ब्लेक होल नहीं होता। अनिल थानवी पृथ्वी व ग्रहों के बनने व उनके भविष्य की एक रोचक कहानी बताते है। हमारी पृथ्वी के एक चन्द्रमा की उत्पत्ति कैसे हुई तथा सौर मण्डल के सभी दुसरे चन्द्रमा कैसे बनते है और आगे जाकर कैसे उनका अन्त हो जाता है। यानि ये आकाशीय पिण्डो की उत्पत्ति से लेकर संपूर्ण अन्त तक की पूरी कहानी अपने चक्रमय या दोलनीय ब्रम्हाण्ड के एक रोचक आइडिये से बता रहे है। पूर्व में वैज्ञानिको द्वारा चक्रीय या दोलनीय या धढकते ब्रम्हाण्ड का जो आइडिया दिया जाता रहा है उससे इनका आइडिया एकदम भिन्‍न नया तथा बेहद रोचक है। श्री थानवी महाद्वीपों महासागरो के बनने व संपूर्ण जियोलोजी को नये ढंग से समझाते है तथा साथ ही साथ जीवन की उत्पत्ति और इसके विकास तथा पृथ्वी पर पानी सबसे पहले कैसे अस्तित्व में आया इसकी अपने दोलनीय ब्रम्हाण्ड के इस नये आइडिये से समझा रहे है। थानवी का कहना है कि कोई भी आकाशीय पिण्ड और ब्रम्हाण्ड घूर्णन नहीं करते बल्कि मरोड़े व निचोडे जाते हुए दोलन करते रहते है तथा इन सभी के दोलन या धढकने की आवृति अलग अलग होती है इसका प्रभाव सम्पूर्ण विज्ञान पर कैसे पड़ता है बड़ा ही रोचक व वैज्ञानिक दृष्टि से प्रभावशाली है। अब तक श्री थानवी की तीन पुस्तके प्रकाशित हो चुकी है व रिसर्च पेपर भी प्रकाशित हुए है। इन्होने IUCAA RESOURCE CENTER, Udaipur (Raj.) में भी अपना शोध अनेक बार प्रस्तुतीकरण किया है तथा मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के भौतिक विभाग भूगर्भ विभाग में भी अपना प्रस्तुतीकरण किया है। साथ ही जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के भूगर्भ विभाग में दो बार अपने दोलनीय ब्रम्हाण्ड के बारे में व इसके जियोलोजी पर पड़ने वाले प्रभावों को विस्तार से विडियो व ऐनीमिशन द्वारा भी समझाया है। श्री अनिल थानवी के दोलनीय ब्रम्हाण्ड के इस एकदम नये व भिन्‍न आइडिया को अनेक वैज्ञानिको व शोध कर्ताओ ने बड़ा रोचक बताया है और इस पर प्रायोगिक व गणितीय शोध करने को भी महत्वपूर्ण कहा है।

श्री अनिल कुमार थानवी, अध्यापक
शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार
पिता श्री हरि गोपाल थानवी,
जूनागढ के पास, फर्नीचर मार्केट, पुरानी गिन्‍नाणी, बीकानेर( राज )