स्व. श्री दीप चंद छंगाणी
पूर्व विधायक फलौदी
श्री दीपचंद छंगाणी का जन्म फलोदी में संवत् 1986 चैत्र कृष्ण तेरस को हुआ। आपके पिताजी श्री पन्नालाल जी छंगाणी धार्मिक व उच्च कोटि के समाजसेवी थे। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा जोधपुर हुई। पंजाब से मैट्रिक परीक्षा उत्तीण करने के बाद आपका मन पढ़ाई में नही लगा व पढ़ाई छोड कर आप सामाजिक व राजनैतिक क्षेत्र लगे। बाल प्रवृतियों के प्रति आपका रूझान होने से जोधपुर से किलकारी मासिक पत्रिका का प्रकाशन किया जो बच्चों में बहुत लोकप्रिय रही। राजनैतिक तौर पर आप सोशलिस्ट पार्टी शरीक हो गये लेकिन कुछ समय बाद स्व. जयनारायण जी व्यास के फलोदी आगमन पर आप व्यासजी की कार्यप्रणाली से प्रभावित होकर कांग्रेस से जुड़ गये। स्थानीय नगरपालिका में सन् 1953 के म्युनिसिपल चुनाव में आप विजीय हुए व अपने सहयोगी युवकों के साथ विपक्ष में रहकर आपने नगर पालिका में सजगता का परिचय दिया। बाद में आपने अपने पिताश्री के आदेश पर नगर पालिका पार्षद पद से इस्तीफा दे दिया। सन् 1957 में आपने मजदूर संघ के बैनर तले नगर पालिका में विजय हासिल की सफाई व रोशनी व्यवस्था में सुधार, स्थानीय जल समस्या निवारण हेतु सांगीदास थानवी वैल में बोयरिंग करवाकर जलसंकट को दूर करवाने व रेल्वे स्टेशन से लटियाल मंदिर तक डामर सड़क निर्माण करवाने में बोर्ड के तत्कालिन अध्यक्ष श्री रखजी बोहरा को अपूर्व सहयोग दिया। सन् 1961 में जनमोर्चा बैनर तले आपने नगर पार्षद व नगर पालिका अध्यक्ष के रूप में रोशनी व्यवस्था व चुँगी चैकियों का निर्माण कराया। नगर में कॉलेज की कमी को दूर करवाने हेतु आपने राज्य सरकार व बम्बई स्थित पनपालिया बन्धुओं से पत्र व्यवहार किया लेकिन दुर्भाग्यवश कॉलेज की स्थापना का कार्य नहीं हो सका। स्थानीय अस्पताल में शिशु कल्याण कक्ष हेतु बाबूजी थानवी को प्रेरित कर कक्ष का निर्माण कराया। सन् 1962 के चीनी आक्रमण के समय आपने अपने सहयोगियों के साथ करीब एक सौ तोला सोना व पाँच हजार रू. नगद एकत्रित कर सुरक्षा कोष में जमा कराया। आपने फलोदी सुरक्षित सीट पर कांग्रेसी उम्मीदवार को जी जान से सहयोग कर 1962 के विधान सभा चुनाव में विजयश्री दिलवाकर इस क्षेत्र की सुरक्षित सीट को पुनः साधारण सीट में बदलवाया। सन् 1967 के विधानसभा चुनाव में आपको कांग्रेस पार्टी का टिकट न दिये जाने पर आप विद्रोही उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर राज्य विधान सभा में पहँचे। उस समय संयुक्त विपक्ष के मुकाबले विधानसभा में कांग्रेस अल्पमत में रही तब आपने कांग्रेस पार्टी की डूबती नैया को सहारा देकर सत्ता प्रदान कराई। सन् 1972 का विधानसभा चुनाव आपने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा। सन् 1977 में आप पुनः इस विधानसभा के उम्मीदवार थे कि अचानक 27 मई, 1977 को आपका हृदयगति रुक जाने से प्राणान्त हो गया। हर सामाजिक, सार्वजनिक व राजनैतिक कार्यों में हमेशा आगे रहने वाले दीपूजी के अचानक जनता के बीच से उठ जाने से न केवल फलोदी अपितु पश्चिमी राजस्थान को अपार क्षति पहुँची जिसकी पूर्ति की जानी संभव नही। वे एक निर्भीक, कर्मठ व गरीबों के सच्चे साथी थे। क्षेत्र के युवकों को रोजगार दिलवाने, जोधपुर स्थित गाँधी अस्पताल मंे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने, नौकरी पेशा लोगों का स्थानान्तरण, पदोन्नति व गरीब छात्रों को पढाई हेतु पुस्तके, फीस दिलवाने में आप हमेशा सक्रिय रहे।