श्री गोवर्धन दास कल्ला
पूर्व विधायक जैसलमेर
उन्हें जैसलमेर का गांधी कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। उन्होंने अपने जीवन में गांधी की विचारधारा को ही अपना कर रखा और आज तक वे गांधी के बताए मार्ग पर ही चले। वे शुरू से ही गांधीवादी रहे और उन्होंने माणिक्य लाल वर्मा के साथ भी काम किया था।।
शिक्षा से लेकर चिकित्सा ऊर्जा और विभिन्न क्षेत्रों में कल्ला ने अभूतपूर्व योगदान दिया। जिसकी बानगी आज जैसलमेर जिला विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। सरहदी जिले में ऊर्जा के उत्पादन को लेकर जिले में विंड मिल की स्थापना की पहल भी गोरधन कल्ला ने की थी। जिसके बाद से देश भर की विभिन्न कंपनियों ने यहां पर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में बड़ा निवेश कर जिले में रोजगार के अवसर पैदा किए। जैसलमेर में गोवर्धन कल्ला एक ऐसे नेता के रूप में अपनी पहचान रखते थे जो गांधीवादी विचारों से ओतप्रोत थे। वहीं गरीब और पिछड़े तबके के लिए भी कल्ला हमेशा संघर्षरत रहे। कल्ला ने गहलोत को इंदिरा गांधी नहर परियोजना को तेल तक पहुंचाने। जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क के पुणे सीमांकन करवाने ताकि इस इलाके के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके का वादा लिया था।
कई दिनों तक अस्वस्थ चलने के बाद 9 सितम्बर 2019, सोमवार को उनका निधन हो गया। मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार व्यास छतरी श्मशान घाट पर किया गया। एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उनकी कुशलक्षेम पूछने आए थे। प्रखर गांधीवादी नेता गोवर्धन कल्ला के देवलोक गमन पर आज उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में शामिल लोगों को देखकर स्वता ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कल्ला की लोकप्रियता जैसलमेर में क्या थी।
वहीं उससे पहले कैबिनेट मंत्री बीडी कल्ला, सालेह मोहम्म्द, हरीश चौधरी व सीएम के बेटे वैभव गहलोत भी उनसे मिलने पहुंचे थे। गोवर्धन कल्ला शुरू से ही कांग्रेस में सक्रिय रहे। उन्होंने 1989 में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा और केवल 2200 मतों से हार गए थे। उनके बारे राजनीतिक गलियारों में कहा जाता है कि जातिगत वोट नहीं होने के बावजूद गोवर्धन कल्ला ही थे जो चुनाव लड़े, अब ऐसी संभावनाएं बिल्कुल नहीं है।