श्री दीनदयाल ओझा ‘जैसलमेर‘‘
जैसलमेर के राजघराने से हाकिमाई प्राप्त श्री मोती लाल जी ओझा के घर विक्रम संवत १९८६ में जैसलमेर में आपका जनमहुआ पिता माणक लाल जी और माता बुली जी की कृपा से आप ने अपना जीवन राजसी ठाट से मनाया ! आप ने शिक्षा के साथ रेलवे में पदभार ग्रहण कर बीकानेर को अपनी कर्म भूमि बनाया! जैन मुनि श्री अगर चंद नाहटा के निकट लोगो में आपका विशेष स्थान रहा ! बीकानेर में रहते हुए आपने भूषण प्रभार साहित्य रत्न राजनीती रत्न की शिक्षा प्राप्त की मानद उपधि की फेहरिस्त भी काफी बड़ी है जो आपने प्राप्त की साहित्य महो पाध्याय मानद रोटेरियन विषित साहित्यकार और राजस्थानी रा डाक्टर की उपाधि राजस्थान भाषा साहित्य एंव संस्कृति अकादमी बीकानेर से प्राप्त की २००३ में लखोटिया पुरूस्कार सेठ फूलचंद बांठिया पुरस्कार जिला स्तर पर १५.०८.२००३ को तसामान मह्रवल हरिराय पुरस्कार पण्ब्रजमोहन जोशी सहित्य पुरस्कार आज तक ७०० से अधिक लेख भिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित राजस्थानी साहित्य की २५ से अधिक पुस्तक और ५० से अधिक पुस्तकों की समादक का कार्य आप द्वारा ११९५५ से अनवरत जारी हैं